Thursday, August 13, 2020

सम्बन्धों का स्पर्श

💐अनुभवी संदेश💐
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एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे , जिनमे पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी , और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी .

युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे , और उन्हें दादा दादी की तरह सम्मान देते थे . इसलिए हर रविवार को वो उनके घर उनके स्वास्थ्य आदि की जानकारी लेने और कॉफी पीने जाते थे .

युवा युगल ने देखा कि हर बार दादी जी जब कॉफ़ी बनाने रसोईघर में जाती थी तो कॉफ़ी की शीशी के ढक्कन को दादा जी से खुलवाती थी .

इस बात का संज्ञान लेकर युवा पुरुष ने एक ढक्कन खोलने के यंत्र को लाकर दादी जी को उपहार स्वरूप दिया ताकि उन्हें कॉफी की शीशी के ढक्कन को खोलने की सुविधा हो सके .

उस युवा पुरुष ने ये उपहार देते वक्त इस बात की सावधानी बरती की दादा जी को इस उपहार का पता न चले ! उस यंत्र के प्रयोग की विधि भी दादी जी को अच्छी तरह समझा दी .

उसके अगले रविवार जब वो युवा युगल उन वरिष्ठ नागरिक के घर गया तो वो ये देख के आश्चर्य में रह गया कि दादी जी उस दिन भी कॉफी की शीशी के ढक्कन को खुलवाने के लिए दादा जी के पास लायी ! !! युवा युगल ये सोचने लगे कि शायद दादी जी उस यंत्र का प्रयोग करना भूल गयी या वो यंत्र काम नही कर रहा !

जब उन्हें एकांत में अवसर मिला तो उन्होंने दादी जी से उस यंत्र के प्रयोग न करने का कारण पूछा . दादी जी के उत्तर ने उन्हें निशब्द कर दिया..! !!

दादी जी ने कहा - "ओह ! कॉफी की शीशी के ढक्कन को मैं स्वयं भी अपने हाथ से , बिना उस यंत्र के प्रयोग के आसानी से खोल सकती हूँ , पर मैं कॉफी की शीशी का ढक्कन उनसे इसलिए खुलवाती हूँ कि उन्हें ये अहसास रहे कि आज भी वो मुझसे ज्यादा मजबूत हैं . और मैं उन्हीं पर आश्रित हूँ , इसीलिए वे हमारे घर के पुरुष हैं ! 

*इस बात से मुझे भी ये लाभ मिलता है कि मैं ये महसूस करती हूँ कि मैं आज भी उन पर निर्भर हूँ , और वो मेरे लिए आज भी बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं . यही बात हम दोनों के स्नेह के बंधन को शक्ति प्रदान करती है .*

*किसी भी युगल की एकजुटता ही उनके सम्बन्ध की बुनियाद होती है ! अब हम दोनों के पास अधिक आयु नही बची है , इसलिए हमारी एकजुटता हम दोनों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है ."*

*उस युवा युगल को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख मिली . वरिष्ठ नागरिक चाहे घर में किसी भी प्रकार की आमदनी का कोई सहयोग ना दे रहे हों , पर उनके अनुभव हमें पल पल महत्वपूर्ण सीख देते रहते हैं .*

*सदैव प्रसन्न रहिये*

*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*
*जिसका मन मस्त है*
*उसके पास समस्त है!!*
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Saturday, August 8, 2020

प्रेम दिवास्वप्न या फिर अंतहीन यात्रा

अक्सर मेरे अंतर्मन में यही प्रश्न घूमता रहता है ?आखिर प्रेम क्या है? क्या यह एक दिवास्वप्न है ?या फिर एक अंतहीन यात्रा है ?जिसमें पड़ाव के रूप में साथी मिलते रहते हैं समय के साथ साथ हमारी प्रेम के प्रति धारणा बदलती रहती है अथवा हम समझ ही नहीं पाए.... आखिर प्रेम है क्या क्योंकि जब हम युवा पीढ़ी को देखते हैं तो शारीरिक आकर्षण देह प्रदर्शन को माध्यम बनाकर अपना क्षणिक एक दूसरे को प्रेम प्रदर्शन करते रहते हैं ...परंतु वास्तविकता में प्रेम एक आनंद  है जीवन जीने का वह तरीका है जिसमें आप किसी के प्रति सद्भावना रखते हैं... पवित्र मन से उसकी उन्नति चाहते हैं तो सदैव उसका मंगल हो ऐसी कामना की जाती है... इसमें कहीं भी लेनदेन का भाव नहीं है ।नाही इसमें मैं भी करूं तो आपको भी करना है इस तरह का कोई भाव छिपा होता है ...साहित्यकार प्रेम को अपनी प्रकृति के प्रेम के प्रति आराध्य के प्रति गीतों के माध्यम से, सृजन के माध्यम से, प्रदर्शित करते हैं ..परंतु क्या कभी किसी जानवर को अपना प्रेम भौतिक संसाधनों से प्रदर्शित करते हुए देखा जा सकता है? कदापि नहीं यह एक अंतहीन यात्रा है बशर्ते व्यक्ति अपने मनोविज्ञान में यह स्थापित कर ले मुझे केवल सबसे पहले स्वयं से प्रेम करना है ,इस जगत में जितने भी ईश्वर के द्वारा रचित मुख्य मंडल है संत साहित्याचार्य हैं माता-पिता है मित्र हैं उनके प्रति प्रेम ही करना है चाहे अन्य लोग हमारे बारे में कुछ भी सोचे यह उनका विषय हो सकता है ....फिर भी कभी कभी मेरे मन में यही विचार आता है आखिर प्रेम कोई दिवास्वप्न तो नहीं जिसमें व्यक्ति भ्रमित अवस्था में घूमता रहता है, या यह अंतहीन यात्रा है।

Monday, August 3, 2020

रक्षाबंधन का पावन त्योहार

यह पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।

 

रक्षासूत्र

प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियाँ और महिलाएँ पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे भी होते हैं। लड़के और पुरुष तैयार होकर टीका करवाने के लिये पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधी जाती है और पैसों से न्यौछावर करके उन्हें गरीबों में बाँट दिया जाता है। भारत के अनेक प्रान्तों में भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियाँ लगाने की प्रथा भी है। भाई बहन को उपहार या धन देता है। इस प्रकार रक्षाबन्धन के अनुष्ठान को पूरा करने के बाद ही भोजन किया जाता है। प्रत्येक पर्व की तरह उपहारों और खाने-पीने के विशेष पकवानों का महत्त्व रक्षाबन्धन में भी होता है। आमतौर पर दोपहर का भोजन महत्त्वपूर्ण होता है और रक्षाबन्धन का अनुष्ठान पूरा होने तक बहनों द्वारा व्रत रखने की भी परम्परा है। पुरोहित तथा आचार्य सुबह-सुबह यजमानों के घर पहुँचकर उन्हें राखी बाँधते हैं और बदले में धन, वस्त्र और भोजन आदि प्राप्त करते हैं। यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्त्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फ़िल्में भी इससे अछूते नहीं हैं।

 

पौराणिक प्रसंग

रक्षा सूत्र बंधन का त्योहार कब शुरू हुआ, इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं मिलती लेकिन यह पर्व है अत्यंत प्राचीन, क्योंकि इसकी प्राचीनता के प्रमाण उपलब्ध हैं। भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है। भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है)-

 

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

 

(श्रीशुक्लयजुर्वेदीय, माध्यन्दिन वाजसनेयिनां, ब्रम्हकर्म समुच्चय पृष्ठ -295 )  

 

इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- 

"जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"  

Saturday, August 1, 2020

सौतेला व्यवहार....

सुबह जब अखबार पढ़ा मैं स्तब्ध था... क्योंकि  राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में चुने गए विधायकों को बागी शब्द से संबोधित किया गया ।
सरकार ने अपने बजट घोषणाओं को पूर्ण करते हुए निजी एवं स्ववित्तपोषित कॉलेजों को बजट घोषित किया है। बांदीकुई में 2003 से कांग्रेस सरकार के ही महत्वपूर्ण निर्णय के द्वारा तत्कालीन उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री शैलेंद्र जोशी के नेतृत्व में महिला महाविद्यालय का गठन किया गया इस उम्मीद के साथ इसका भी अधिग्रहण सरकारी क्षेत्र के रूप में हो जाएगा परंतु राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं गुटबाजी के चलते बांदीकुई के साथ सौतेला व्यवहार किया गया यहां पहले से संचालित महिला महाविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार करने के स्थान पर एक नया सरकारी कन्या महाविद्यालय खोल दिया गया जिसमें सुविधाएं दूर-दूर तक नहीं है ना कोई स्थापित प्राचार्य है और शैक्षणिक  स्टाफ का अभाव है। जबकि अन्य स्ववित्तपोषित कॉलेजों की तरह बांदीकुई के कन्या महाविद्यालय के स्थान पर पूर्व संचालित महिला महाविद्यालय को इस प्रोजेक्ट में लिया जा सकता था। आज समझ में आया है ऐसा क्यों हुआ क्योंकि यहां के विधायक को बागी कहा गया है क्योंकि उसने जनता के हितों की बात रखने की कोशिश की
दुर्भाग्य से आम जनता, पत्रकारों की लेखनी भी चुप रही महा विद्यालय प्रबंध समिति ने कोई विरोध नहीं किया गया,और उसी का परिणाम है कि सरकार के एकपक्षीय निर्णय को हम स्वीकार या तो कर रहे हैं या अपनी मौन स्वीकृति दे रहे हैं बांदीकुई की जनता अभागी की तरह इस निर्णय के आगे मौन है....

Friday, July 31, 2020

राजस्थान सरकार संकट!

✒️मेरी कलम से......
ईद मुबारक राजस्थान सरकार!
खबरों से पता लगा सरकार ने अपनी मंडी जैसलमेर में शिफ्ट कर दी है,,,हो सकता है माननीय मुख्यमंत्री की भाषा के अनुसार उनके ...हलाल ना हो जाए.जयपुर में पैरामाउंट में खतरा हो गया हो ...सोचने वाली बात है जब खुद की रोजी रोटी पर संकट आया तो कैसे बैचैनी हो रही है।क्या कभी सरकार ने सोचा उनके एक निर्णय से प्रदेश के लाखों बेरोजगार,सविंदा कर्मी,अनुबंध कर्मचारी,व्यापारी पर क्या गुजरती होगी।उनके सामने सिर्फ तुगलकी फरमान को स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता है।महामारी के इस दौर में मानवता शून्य हो गई है...सरकार पांच सितारा होटल में है,,,अपने अस्तित्व को बचाने में लगी है,,,घर के दीपक से आग लगी और खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोचने में लगी है।जब आपके पास विश्वास की पूंजी है तो बाड़ेबंदी का ओचित्य क्या है?विपक्ष केवल नजर लगाए बैठा है शायद बंदरबाट का अवसर मिल जाए,,,परन्तु इन सब का सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है।जाता,पात,नेकर,पैंट पर आपसी भाईचारा खतरे में है और सरकार अपने ....हलाल होने से बचाने में लगी है।

Wednesday, July 22, 2020

जब तुम्हारा मन था....

 जब तुम्हारा मन था
अपना क्षणिक संग था
अब तुम्हारा मन नहीं
टूटा संग जाने कहीं
मैं पहले भी चुप था
आज भी निःशब्द
फर्क साफ है
तुम आज भी
बातों से पहले
भूमिका बनाती हो
और मैं पहले की तरह
जुबान से नहीं
ह्रदय से बात करता हूूूं....
बुरा भी लगा होगा
मेरा आज का बर्ताव
पर मैं भी क्या करुं
संस्कारो की डोर से
बंधा हूँ मूल्यो की व्यवस्था में
काल्पनिक दुनिया के सब द्वार
आज तुम्हारे लिए बन्द है
कम से कम चिन्तन तो होगा
भावनाओं को शब्दों का
वस्त्र पहनाना आसान है
पर कठिन है
आँखों में आँखे डालकर
ये कहना
अकेले मैं तुम ही
मेरे सबसे करीब थे
निशब्द है आज सारी जुबान

Monday, July 20, 2020

पहली बरसात की बूंद

पहली बरसात की बूंद
गिरते ही माटी की
गंध हो तुम
पक्षीयो के कलरव के बीच
मोर की पीहू पीहू हो तुम
सांझ होते ही मंदिर की
झालर धण्टा ध्वनि हो तुम
तपती धूप में माथे की सलवटो में
पडी़ पसीने की बूंद हो तुम
पत्तो से छन कर धरा पर गिरने वाली
रोशनी की पहली किरण हो तुम
मासूम चेहरे पर उभरते सवालों का
जवाब हो तुम
अब मैं और क्या कहूूूं
मेरे पास शब्द नहीं है
बहुत लाजवाब हो तुम...

सम्बन्धों का स्पर्श

💐अनुभवी संदेश💐 💐💐💐💐💐💐 एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे , जिनमे पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी , और ...